इस तरह फैक्ट्री में बनता है लक्स साबुन (LUX) | LUX SOAP Production In Factory

LUX SOAP Production In Factory

दोस्तों, हममें से ज्यादातर लोगों को नहाना पसंद नहीं होता है। वैसे सर्दियों में तो काम चल भी जाता है, लेकिन गर्मियों में ना चाहते हुए भी मजबूरन नहाना ही पड़ता है और इसी का फायदा उठाती हैं बड़ी बड़ी कंपनियां। आज बाजार में आपको ढेरों bath soap देखने को मिल जाएंगे, लेकिन इनमें से एक bath soap ऐसा है जिसका नाम और दाम हर भारतीय को मालूम है। इतना ही नहीं इस साबुन की खुशबू और आकार भी सभी जानते हैं। जी हां दोस्तों यह कोई और साबुन नहीं बल्कि हमारा LUX है। आप सब ने अपने जीवन में कभी ना कभी तो नहाने के लिए LUX का इस्तेमाल तो किया ही होगा, और शायद आप में से बहुत से ऐसे भी होगें जो अभी भी कर रहे हैं, बता दूं, उनमें एक मैं भी हूं। जहां भारत के ज्यातार घर में LUX का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके मन में LUX को लेकर शक भी है कि इसमें जानवरों की चर्बी मिलाई जाती है। वैसे इस बात में कितनी सच्चाई है, आखिर LUX साबुन बनते कैसे हैं?

लक्स साबुन ब्रिटिश कंपनी यूनिलीवर की सहायक कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर का एक लोकप्रिय ब्रांड है। यूं तो हिंदुस्तान यूनिलीवर का एक-एक प्रोडक्ट भारत के कोने-कोने में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन लक्स साबुन की बात ही कुछ और है। लक्स साबुन, कंपनी के उन प्रोडक्ट्स में से है जिसे भारत के लगभग सभी घरों में इस्तेमाल किया जाता है। वैसे दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें, हिंदुस्तान युनिलीवर Lifebuoy और Dove जैसे साबुन भी बनाती है। जी हां, यानी आप साबुन चाहे कोई सा भी खरीदें, पैसा तो सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही कंपनी के जेब में जायेगा और वो है हिंदुस्तान युनिलीवर। वैसे हमें इस से क्या लेना देना, तो हम आते हैं मेन मुद्दे पर।

दोस्तों अगर लक्स साबुन के Ingredients के बारे में बाते करें तो जब आप लक्स के पैक पर उसके Ingredients को पढ़ेंगे तो आपको सोडियम टेलोवेट नाम का एक Ingredient वहां लिखा दिख जाएगा। जिन लोगों को नहीं पता उन्हें बता दें, सोडियम टेलोवेट को जानवरों के फैट से निकाला जाता है, और वह भी ज्यादा तर गाय के फैट से, तो हां जिन लोगों को LUX को लेकर यह शक है कि इसमें एनिमल फैट है तो बता दें, उनका शक बिल्कुल सही है। 

और तो और आपको ये भी बता दे सिर्फ LUX ही नहीं बल्कि भारत के ज्यादातर soaps में सोडियम टेलोवेट को मिलाया जाता है और यह आज से नहीं बल्कि सालों से यह साबुन इसी तरह बनते आ रहे हैं। इसकी वजह है कि इस फैट का सस्ता होना और ज्यादातर यह खराब या बचे हुए फैट से ही बनाया जाता है जिस वजह से कंपनी के पास इसे इस्तेमाल करने के कई कारण मौजूद हो जाते हैं।

अगर LUX के मैन्युफैक्चरिंग की बात की जाए तो लक्स साबुन बनाने के लिए सबसे पहले पाम ऑयल को प्रोसेस और ब्लीच किया जाता है ताकि बेटर क्वालिटी के पाम ऑयल को LUX के लिए निकाला जा सके। बेटर क्वालिटी के पाम ऑयल को निकालने के बाद उसे एक कंटेनर में इकट्ठा किया जाता है जहां उसमें कास्टिक सोडा और फैट को मिक्स किया जाता है। अब इस मिक्सचर को एक मशीन की सहायता से 18 मिनट तक उबाला जाता है।

एक तय समय सीमा के बाद यह मिक्सचर जब गाढ़ा हो जाता है तब उसे यहां से निकाल कर एक ऐसी मशीन में डाला दिया जाता है जहां इस मिक्सचर को रिबन जैसा शेप दिया जाता है, जो कि देखने में भी बेहद ही खूबसूरत लगता है लेकिन इसकी खूबसूरती को देखकर आप गलती से भी इसे छूने की कोशिश मत कीजिएगा। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपकी चमड़ी तक बाहर आ सकती है। क्योंकि इस समय यह काफी गर्म होता है।

अब इस रिबन को ठंडा करने और इसके शेप को बदलने के लिए इसे कनवेयर बेल्ट से आगे ले जाया जाता है जहां ये दो rollers के बीच से गुजरता है। इन rollers से गुजरने पर रोटी की तरह यह रिबन आपस में जुड़कर फ्लैट हो जाते हैं। अब इन्हें grind करने के लिए एक grinder से गुजारा जाता है। इस पावरफुल grinder से निकलने के बाद इसे एक बार फिर से एक कंटेनर में रखा जाता है जहां इसमें सेंटेड आयल और कलर मिक्स किए जाते हैं अब कलर और सेंट मिलने के बाद इस पूरे मिक्सचर को एक pressurized मशीन में डाल दिया जाता है। जहां मशीन इस मिक्सचर को लंबी लंबी stick में तब्दील कर देती है।

अब इस लम्बी stick को सबसे पहले कुछ कुछ जगह पर कट मार कर कई भाग कर दिए जाते हैं। इस स्टेज पर इसका colour आपको थोड़ा-थोड़ा जाना पहचाना सा यानी लक्स साबुन जैसा दिखना शुरू भी हो गया होता है लेकिन अभी भी इसे सही shape नहीं दिया गया होता है। आपको पूरी तरह यकीन दिलाने के लिए की यह लक्स ही है अब इस साबुन की लंबी लंबी stick को एक मशीन में डाला जाता है जहां उसे रोटेट किया जाता है। अब यहां पर एक गर्म Stamping मशीन की मदद से एक साथ पूरे stick पर कंपनी का नाम और लोगो स्टैंप कर दिया जाता है। इतना होने के बाद यह stick आगे भेज दी जाती है और फिर एक और ऑटोमेटिक मशीन इन्हें single pieces में cut कर देती है।

दोस्तों, इस मशीन के आने से company को काफ़ी benifits हुआ है और काम भी आसान हो गया है। वरना सालों पहले इन साबुन को cut करने वाली जब ये मशीन नही थी तब इंसानों द्वारा ही इसे cut किया जाता था। इंसानों द्वारा काटे जाने के कारण बहुत बार साबुन टेढ़े मेढ़े कट जाते थे जिससे ना सिर्फ उनका आकार बल्कि उनका वजन भी गड़बड़ हो जाता था। इससे कंपनी को काफी नुकसान उठाना पड़ता था।

लक्स के साबुन को shape देने का एक process यह भी है कि पहले से ही इन्हें single single pieces में काट लिया जाए और फिर इसके बाद इन्हें एक डाई या shaping मशीन में डालकर आकार दिया जाए। single single piece में कट जाने के बाद इन साबुनो को पैकेजिंग के लिए आगे भेज दिया जाता है और यहां पर भी हर बार की तरह मशीने बखूबी पैकेजिंग से लेकर इंस्पेक्शन तक का सारा काम खुद ही संभाल लेती है।

दोस्तों, यहां हम आपकी जानकारी के लिए बता दें, ज्यादातर साबुन बनाने का प्रोसेस तो एक जैसा ही होता है लेकीन Ingredients में कुछ difference हो सकता है। example के लिए अगर हम ब्यूटी शॉप को किनारे करके 1 मिनट के लिए डिटॉल जैसे एंटीबैक्टीरियल शॉप की तरफ भी गौर करें तो आपको इसके Ingredients में साफ फर्क नजर आ जाएगा जैसे डिटॉल बनाने के लिए क्लोरो जाईनेलोन को सबसे पहले कंटेनर में डाला जाता है और फिर उसी में आइसोप्रोपेनॉल और सीड ऑयल डालकर उसे पानी के साथ 2 घंटे गर्म होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इतने वक्त में यह मिक्सर एक गाढा लिक्विड बन जाता है जिसके बाद इसे भी मशीन में डालकर रिबंस बना लिया जाता हैं। रिबंस के बाद यह रोलर में जाएगा, रोलर से ग्राइंडर में और कलर और सेंड ऐड किया जाएगा। ऐड करने के बाद हम फिर से इसे pressurized मशीन में डालकर स्टिक की शेप में निकाल लेंगे।

दोस्तों, एक बार फिर लक्स पर लौटे तो आज लक्स भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला साबुन है।

ये सोचने वाली बात है कि आखिर हिंदुस्तान यूनिलीवर ने लक्स साबुन के साथ ऐसा क्या किया जो ये घर-घर की पसंद बन गया?

आइए शुरूआत से इसे समझते हैं, लक्स का जन्म इंग्लैंड के एक cottage industry में लॉन्ड्री सोप यानी कपड़े धोने वाले साबुन के रूप में हुआ था। उस समय इसका नाम सनलाइट फ्लेक्स हुआ करता था। बाद में कम्पनी को पता चला कि जिस साबुन को उन्होंने कपड़े धोने के लिए बनाया था उससे महिलाएं नहाती भी हैं। जिसके बाद कंपनी ने महिलाओं को ध्यान में रखकर ग्लिसरीन और पॉम ऑयल की मदद से बनाया एक झागदार व खुशबूदार टॉयलेट सोप जिसे इन्होंने नाम दिया हनी सोप और यही आगे जाकर लक्स बना। भारत में लक्स की मौजूदगी बहुत पुरानी है लक्स को 1929 से अब तक भारत में आए 93 साल हो चुके हैं और अभी तक यहां इसकी डिमांड कम नहीं हुई।

वैसे दोस्तों लक्स की सफलता का राज उसकी मार्केटिंग स्ट्रैटजी भी है। कंपनी ने इसे घर-घर की पसंद बनाने के लिए जमकर प्रमोशन किया, company ने दुनिया को यह दिखाया कि लक्स कोई आम साबुन नहीं बल्कि सुपरस्टार का साबुन है। कम्पनी ने देश की बड़ी-बड़ी हस्तियों को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाया। उन्होंने सबसे पहले मधुबाला फिर सायरा बानू जैसी हीरोइंस को अपने ऐड में लेना शुरू किया और आज के वक्त में भी ये बड़े सितारों के साथ काम कर रहे हैं। उनका मार्केटिंग फंडा काफी सिंपल है, उन्हें अपने ब्रांड को इस तरह दिखाना होता है कि बड़े से बड़े लोग उन्हें इस्तेमाल करते हैं।

कम्पनी ने देश की आम जनता का भी खास ध्यान रखा। कहने का सीधा मतलब ये है कि घर-घर पहुंचने के लिए उनका बजट ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही कम पैसों में आप अपने प्रोडक्ट को कैसे बाकी प्रोडक्ट से बेहतर बना सकते हैं, कंपनी ने इस सभी बातों का बहुत बारीकी से ध्यान रखा और अपने उद्देश्य में सफल भी हुई। यही वजह है कि आज इस महंगाई के दौर में भी लक्स लोगों को सिर्फ 10 रुपये में बेहतरीन खुशबू वाला लक्स आसानी से छोटी से छोटी दुकान पर भी मिल जाता है। आज LUX भारत और एशिया में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री का कारण बना है और आज अकेले लक्स साबुन का सालाना टर्नओवर एक से दो हजार करोड़ के बीच बताया जाता है।

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